Tuesday, June 20, 2017

बालि ने मरते समय अंगद को बताई थीं ये बातें

रामायण में जब श्रीराम ने बालि को बाण मारा तो वह घायल होकर गिर पड़ा था। इस हालत में जब उसका पुत्र अंगद उसके पास आया तब बालि ने उसे ज्ञान की कुछ बातें बताई थीं। ये बातें आज भी हमें कई परेशानियों से बचा सकती हैं। यहां जानिए ये बातें कौन सी हैं...
मरते समय बालि ने अंगद से कहा-

देशकालौ भजस्वाद्य क्षममाण: प्रियाप्रिये।
सुखदु:खसह: काले सुग्रीववशगो भव।।

इस श्लोक में बालि ने अगंद को ज्ञान की तीन बातें बताई हैं...
1. देश काल और परिस्थितियों को समझो। इसके बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।
2. किसके साथ कब, कहां और कैसा व्यवहार करें, इसका सही निर्णय लेना चाहिए।
3. पसंद-नापसंद, सुख-दुख को सहन करना चाहिए और क्षमाभाव के साथ जीना चाहिए।
बालि ने अंगद से कहा ये बातें ध्यान रखते हुए अब से सुग्रीव के साथ रहो।
ये है बालि वध का प्रसंग...

जब बालि श्रीराम के बाण से घायल होकर गिर पड़ा, तब बालि ने श्रीराम से कहा- ‘आप धर्म की रक्षा करते हैं तो मुझे इस प्रकार बाण क्यों मारा?’
इस प्रश्न के जवाब में श्रीराम ने कहा- ‘छोटे भाई की पत्नी, बहिन, पुत्र की पत्नी और पुत्री, ये सब समान होती हैं और जो व्यक्ति इन्हें बुरी नजर से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता है। बालि, तूने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी पर बुरी नजर रखी और सुग्रीव को मारना चाहा। इस पाप के कारण तुझे बाण मारा है।‘
इस जवाब से बालि संतुष्ट हो गया और श्रीराम से अपने किए पापों की क्षमा याचना की। इसके बाद बालि ने अगंद को श्रीराम की सेवा में सौंप दिया।
इसके बाद बालि ने प्राण त्याग दिए। बाली की पत्नी तारा रोने लगी। तब श्रीराम ने तारा को ज्ञान दिया कि यह शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु से मिलकर बना है। बालि का शरीर तुम्हारे सामने सोया है, लेकिन उसकी आत्मा अमर है तो रोना नहीं चाहिए। इस प्रकार समझाने के बाद तारा शांत हुई। श्रीराम में सुग्रीव को राज्य सौंप दिया।

Monday, June 19, 2017

किसी को खाना खिलाते समय ध्यान रखें 4 बातें, मिलेगा पुण्य, होंगे लाभ

धर्म ग्रंथों में मेहमान के महत्व के बारे में कई बातें बताई गई हैं। घर आए मेहमान को भगवान के समान माना जाता है। हिंदू धर्म में भगवान के हवन या कई त्यौहारों पर घर आए अतिथियों को भोजन करना का महत्व है। अतिथि के सत्कार को लेकर शिवपुराण में 4 ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका पालन किया जाए तो मनुष्य को अतिथि को भोजन करवाने का फल जरूर मिलता है।
घर आए मेहमान को भोजन करवाते समय ध्यान रखें इन 4 बातों का-
1. साफ हो मन
कहा जाता है कि जिस मनुष्य का मन शुद्ध नहीं होता, उसे कभी भी अपने शुभ कर्मों का फल नहीं मिलता है। घर आए अतिथि का सत्कार करते समय या उन्हें भोजन करवाते समय कोई भी गलत भावों को मन में नहीं आने देना चाहिए। अतिथि सत्कार के समय जिस मनुष्य के मन में जलन, क्रोध, हिंसा जैसे बातें चलती रहती है, उसे कभी अपने कर्मों का फल नहीं मिलता है। इसलिए, इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
2. शुद्ध हो शरीर
मेहमान को भगवान के समान माना जाता है। अपवित्र शरीर से न भगवान की सेवा की जाती है और न ही मेहमान की। किसी को भी भोजन करवाने से पहले मनुष्य को शुद्ध जल से स्नान करके, साफ कपड़े धारण करना चाहिए। अपवित्र या बासी शरीर से की गई सेवा का फल कभी नहीं मिलता है।
3. उपहार जरुर दें...
घर आए मेहमान को भोजन करवाने के बाद कुछ न कुछ उपहार में देने का भी विधान है। अपनी श्रद्धा के अनुसार मेहमान को उपहार के रूप में कुछ जरूर देनी चाहिए। अच्छी भावनाओं से दिया गया उपहार हमेशा ही शुभ फल देने वाला होता है।
4. आपकी वाणी हो मधुर
मनुष्य को कभी भी घर आए अतिथि का अपमान नहीं करना चाहिए। कई बार मनुष्य क्रोध में आकर या किसी भी अन्य कारणों से घर आए मेहमान का अपमान कर देता है। ऐसा करने पर मनुष्य पाप का भागी बन जाता है। हर मनुष्य को अपने घर आए मेहमान का अच्छे भोजन से साथ-साथ पवित्र और मीठी वाणी के साथ स्वागत-सत्कार करना चाहिए।

Saturday, June 17, 2017

नए काम की शुरुआत मुहूर्त देख कर ही करें होगा है लाभ

कहते हैं कोई भी शुभ काम करने के पहले हमें भगवान का आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए और साथ ही काम की शुरुआत शुभ मुहूर्त देख कर ही कि जानी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथ मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार दिन में अलग-अलग चौघड़िए और नक्षत्र व लग्न हाेते हैं। इनमें शुभ फल देने वाले और अशुभ फल देने वाले दोनों ही शामिल हैं।

जानकारों के अनुसार अशुभ चौघड़िए में शुरू किए गए काम बड़ी समस्याओं के साथ पूरे होते हैं या अधूरे ही रह जाते हैं। जबकि शुभ मुहूर्त (चौघडिय़ा) या नक्षत्र व लग्न में शुरू किए गए काम बिना किसी विघ्न या बाधा के पूरे हो जाते हैं और इसका शुभ फल भी मिलता है। शुभ मुहूर्त में शुरू किए गए काम हमें अच्छे फल प्रदान करते हैं साथ ही इसका हमारे परिवार और सभी संबंधित व्यक्तियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी भी नए काम से पहले पंडित से मुहूर्त जरूर निकलवाना चाहिए।
शुभ समय में ग्रह स्थिति कुछ इस प्रकार रहती है जो कि हमारे मांगलिक काम को पूरा करने में सहयोग प्रदान करती है। इसके अलावा इन मूहूर्त में शुरू किए गए कामों को दैवीय शक्तियों की कृपा भी मिलती है। इसी वजह से शुभ काम को शुभ मुहूर्त में किया जाता है। ताकि हमारा काम बिना किसी बाधा के पूरा हो और जीवनभर इसका शुभ फल हमें मिल सके।

Thursday, June 15, 2017

रोज महामृत्युंजय का पाठ करने पर होता है दोषों का नाश

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का प्रभावशाली मंत्र है। इसके प्रभाव और शक्तियों का वर्णन कई पुराणों में मिलता है। शिवपुराण के अनुसार, इस मंत्र के पाठ से मनुष्य की सभी बाधाएं और परेशानियां खत्म हो जाती हैं। रोज रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का पाठ करने से अकाल मृत्यु (असमय मौत) का डर दूर होता है।
महामृत्युंजय से होता है इन दोषों का नाश
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग, दुःस्वप्न, गर्भनाश, संतानबाधा कई दोषों का नाश होता है।
महामृत्युजंय मंत्र का पाठ करने से होती है शुभ फल की प्राप्ति
1. दीर्घायु (लम्बी आयु) -
जिस भी मनुष्य को लंबी उम्र पाने की इच्छा हो, उसे नियमित रूप से महामृत्युजंय मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र के प्रभाव से मनुष्य का अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है, इसका का जप करने वाले को लंबी उम्र मिलती है।
2. सम्पत्ति की प्राप्ति -
जिस भी व्यक्ति को धन-सम्पत्ति पाने की इच्छा हो, उसे महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना चाहिए। इस मंत्र के पाठ से भगवान शिव हमेशा प्रसन्न रहते हैं और मनुष्य को कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
3. आरोग्य प्राप्ति -
यह मंत्र मनुष्य न सिर्फ निर्भय बनता है बल्कि उसकी बीमारियों का भी नाश करता है। भगवान शिव को मृत्यु का देवता भी कहा जाता है। इस मंत्र के जप से रोगों का नाश होता है और मनुष्य निरोगी बनता है।
4. यश (सम्मान) की प्राप्ति -
इस मंत्र का जप करने से मनुष्य को समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है। सम्मान की चाह रखने वाले मनुष्य को प्रतिदिन महामृत्युजंय मंत्र का जप करना चाहिए।
5. संतान की प्राप्ति -
महामृत्युजंय मंत्र का जप करने से भगवान शिव की कृपा हमेशा बनी रहती है और हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंत्र का रोज जाप करने पर संतान की प्राप्ति होती है।

Wednesday, June 14, 2017

देवताओं को घर में रोज़ चढ़ाना चाहिए फूल, इससे होते हैं ये बड़े लाभ

सनातन धर्म में भगवान को पुष्प या फूल चढ़ाने को विशेष महत्व दिया गया है। देवी-देवताओं और भगवान को आरती, व्रत, उपवास या त्योहारों पर फूल चढाएं जाते हैं। धार्मिक, अनुष्ठान, संस्कार व सामाजिक कार्यों को बिना फूलों के अधूरा समझा जाता है, लेकिन फिर भी कम ही लोग ये जानते हैं कि भगवान को फूल क्यों चढाएं जाते है। यदि आप भी इसका कारण नहीं जानते हैं तो आइए हम आपको बताते हैं क्या कहते हैं धर्मग्रंथ….

हमारे धर्मग्रंथों मे पुष्प के बारे में कहा गया है

पुण्य संवर्धनाच्चापि पापौघपरिहारत। पुष्कलार्थप्रदानार्थ पुष्पमित्यभिधीयते।।

अर्थ- इसका मतलब है पुण्य को बढ़ाने, पापों को घटाने और फल को देने के कारण ही इसे पुष्प या फूल कहा जाता है।

दैवस्य मस्तकं कुर्यात्कुसुमोपहितं सदा।
अर्थ- देवता का मस्तक या सिर हमेशा फूलों से सुशोभित रहना चाहिए।

पुष्पैर्देवां प्रसीदन्ति पुष्पै देवाश्च संस्थिता
न रत्नैर्न सुवर्णेन न वित्तेन च भूरिणा
तथा प्रसादमायाति यथा पुष्पैर्जनार्दन।

अर्थ- देवता लोग रत्न, सुवर्ण, भूरि, द्रव्य, व्रत, तपस्या या और किसी चीज से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना फूल या पुष्प चढ़ाने से होते हैं।
फूल चढ़ाने का ये है बड़ा कारण

मान्यता है कि पुष्प अर्पित करने से भगवान तुरंत ही प्रसन्न हो जाते हैं। फूलों की सुगंध से हमारे घर का वातावरण महकता रहता है, जिससे मन को शांति मिलती है। दिमाग में हमेशा सकारात्मक विचार आते हैं। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव घर से नष्ट हो जाता है।

ये हमें अच्छा जीवन जीने की भी प्रेरणा देते हैं। फूलों का जीवन कम अवधि का होता है, लेकिन फिर भी वे जब तक मुरझा नहीं जाते तब तक वातावरण में सुगंध फैलाते रहते हैं। इसी प्रकार हमें भी समाज में ऐसा ही स्वभाव रखना चाहिए जिससे हमारे आस-पास लोगों को सुख की प्राप्ति हो सके।

फूलों से दूर होता है वास्तुदोष
वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर में बगीचा होना अनिवार्य बताया गया है। घर के बाहर की वाटिका घर के कई वास्तु दोषों को समाप्त कर देती है। फूल सुगंध और सौंदर्य के प्रतीक हैं। घर के आगे ब्रह्म कमल, गुड़हल, चांदनी, मीठा नीम आदि के पौधे लगाने से हर तरह के वास्तुदोष का नाश होता है।

इसके अलावा पारिजाद, मोगरा, गेंदा व सेवंती के फूलों को भी घर के आंगन में लगाना अच्छा माना गया है। इन सभी फूलों के पौधों को घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला व जीवन में खुशहाली लाने वाला माना गया है।

Monday, June 12, 2017

सनातन धर्म ग्रंथों में लिखी कुछ ऐसी ही रोचक बातें

सनातन धर्म साहित्य बहुत ही विस्तृत है। इसके अंतर्गत अनेक पुराण, वेद, धर्म ग्रंथ व उपनिषद आदि आते हैं। इन सभी ग्रंथों में ऐसी अनेक रोचक बातें बताई गई हैं, जिसे आमजन नहीं जानते। कुछ ने इनके बारे में सुना भी होगा, लेकिन विस्तृत रूप से इनके बारे में जानने वाले बहुत ही कम लोग हैं। आज हम आपको सनातन धर्म ग्रंथों में लिखी कुछ ऐसी ही रोचक बातें बता रहे हैं-

प्रश्न 1. सोने की लंका नगरी में रावण से पहले किसका अधिकार था?

उत्तर- रामायण के अनुसार रावण जिस सोने की लंका में रहता था, वह लंका पहले रावण के भाई कुबेर की थी। जब रावण विश्व विजय पर निकला तो उसने अपने भाई कुबेर को हराकर सोने की लंका पर अपना कब्जा कर लिया।

प्रश्न 2. वाल्मीकि रामायण के अनुसार समुद्र पर रामसेतु बनाने में वानरों को कितना समय लगा?

उत्तर- रामायण के अनुसार, समुद्र पर पुल बनाने में वानरों को पांच दिन का समय लगा। पहले दिन वानरों ने 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया। यह पुल 10 योजन चौड़ा था।

प्रश्न 3. पुराणों में वर्णित अश्वमेध यज्ञ क्या है?

उत्तर-धर्म ग्रंथों में अनेक स्थान पर अश्वमेध यज्ञ का वर्णन आता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम व महाभारत के अनुसार युधिष्ठिर ने भी ये यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ के अंतर्गत एक घोड़ा छोड़ा जाता था। ये घोड़ा जहां तक जाता था, वहां तक की भूमि यज्ञ करने वाले की मानी जाती थी। यदि कोई इसका विरोध करता था, तो उसे यज्ञ करने वाले के साथ युद्ध करना पड़ता था। ये यज्ञ वसंत या ग्रीष्म ऋतु में किया जाता था और करीब एक वर्ष इसके प्रारंभिक अनुष्ठानों की पूर्णता में लग जाता था।

प्रश्न 4. पुष्पक विमान क्या है?

उत्तर- पुष्पक विमान का सर्वप्रथम वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है। वैदिक साहित्य में देवताओं के विमानों की चर्चा है, लेकिन दैत्यों और मनुष्यों द्वारा उपयोग किया गया पहला विमान पुष्पक ही माना जाता है। पौराणिक संदर्भों में विज्ञान की खोज करने वालों की मान्यता है कि प्राचीन भारतीय विज्ञान आधुनिक विज्ञान की तुलना में अधिक संपन्न था। इस लिहाज से इस विमान का अस्तित्व व प्रामाणिकता स्वीकारी जाती है। प्राचीन भारतीय की वैज्ञानिक क्षमता में विश्वास करने वाले मानते हैं कि यह विमान तत्कालीन विज्ञान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण था।

प्रश्न 5. हिंदू नववर्ष का प्रारंभ किस दिन से और क्यों होता है ?

उत्तर-हिंदू नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी पहले दिन से माना जाता है। इस पर्व को गुड़ी पड़वा के नाम से मनाते हैं। ब्रह्मपुराण के अनुसार पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि निर्माण का कार्य प्रारम्भ किया था। इसीलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिन माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार चारों युगों में सबसे प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ भी इसी तिथि से हुआ था।

प्रश्न 6- हिंदू धर्म में किस ग्रंथ को पांचवे वेद की संज्ञा दी गई है?

उत्तर-हिंदू धर्म में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है। इसके रचयिता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास हैं। महर्षि वेदव्यास ने इस ग्रंथ के बारे में स्वयं कहा है- यन्नेहास्ति न कुत्रचित्। अर्थात जिस विषय की चर्चा इस ग्रंथ में नहीं की गई है, उसकी चर्चा अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है। श्रीमद्भागवत गीता जैसा अमूल्य रत्न भी इसी महासागर की देन है। इस ग्रंथ में कुल मिलाकर एक लाख श्लोक है, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहा जाता है।

प्रश्न 7- वाल्मीकि रामायण के अनुसार देवराज इंद्र के रथ के सारथी का नाम क्या है?

उत्तर- देवराज इंद्र के रथ के सारथि का नाम मातलि है। राम-रावण युद्ध के दौरान जब रावण अपने रथ में बैठकर और श्रीराम भूमि पर खड़े रहकर युद्ध कर रहे थे। उस समय इंद्र ने अपना रथ भगवान श्रीराम की सहायता के लिए भेजा था। उस समय भी मातलि ने ही रथ का संचालन बड़ी कुशलता के साथ किया था।