Saturday, December 19, 2015

भूल कर भी न करें ये 5 काम, इनसे हो सकता है अपमान


जीवन में मान-सम्मान का बहुत महत्व है। यह भी कहा जाता है कि जिस व्यक्ति का घर-परिवार, समाज आदि में कोई मान-सम्मान नहीं होता उसे जीते-जी मरे हुए के समान समझना चाहिए। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जब मान-सम्मान की रक्षा के लिए लोगों ने अपने प्राण भी गंवा दिए।
इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें उनके बुरे कामों के कारण जीवन में कभी न कभी अपयश यानी अपमान का सामना करना पड़ता है। गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे कामों के बारे में बताया भी गया है, जिसके कारण व्यक्ति को अपमानित होना पड़ता है। आज हम आपको उन्हीं कामों के बारे में बता रहे हैं। गरुण पुराण के अनुसार वो 5 काम इस प्रकार हैं-


श्लोक
दाता दरिद्र: कृपणोर्थयुक्त: पुत्रोविधेय: कुजनस्य सेवा।
परापकारेषु नरस्य मृत्यु: प्रजायते दुश्चरितानि पञ्च।।

अर्थात्- 1. दरिद्र होकर दाता होना, 2. धनवान होने पर भी कंजूस होना, 3. पुत्र का आज्ञाकारी न होना, 4. दुष्ट लोगों की सेवा करना तथा 5. किसी का अहित करते हुए मृत्यु होना। इन 5 कामों से अपमान ही मिलता है।

1. दरिद्र होकर दाता होना

जब कोई गरीब व्यक्ति अपनी हैसियत से अधिक दान देता है तो उसे व उसके परिवार को धन से संबंधित अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसा वह बार-बार करता है तो कई बार स्थिति बहुत ही कठिन हो जाती है। ऐसा कुछ लोग दूसरों को दिखाने के लिए भी करते हैं, लेकिन इस दिखावे में वह यह भूल जाते हैं कि इसके कारण उसके परिवार को परेशानी हो सकती है। इसलिए दान देते समय अपनी आर्थिक स्थिति जरूर देख लेना चाहिए, नहीं तो आगे जाकर अपमान का सामना करना पड़ सकता है।

2. धनवान होने पर भी कंजूस होना

अगर आपके पास पर्याप्त धन है और फिर भी आप कंजूस हैं तो इसके कारण भी आपको अपमानित होना पड़ सकता है। सोच-समझकर पैसा खर्च करना अच्छी बात है, लेकिन जब ये जरूरत से ज्यादा हो जाता है तो आप कंजूस की श्रेणी में आ जाते हैं। जिस जगह जितना खर्च करना जरूरी है, उतना तो करना ही चाहिए। अगर आप वहां से भी पैसा बचाने की कोशिश करेंगे तो लोग आपको कंजूस ही समझेंगे। कंजूस लोगों को अपनी इस आदत के कारण कई बार अपमान का सामना करना पड़ता है। इसलिए पैसों का सही उपयोग करें, लेकिन कंजूस न बनें।

3. पुत्र का आज्ञाकारी न होना

जिस व्यक्ति का पुत्र उसके कहने में नहीं होता, उसे भी परिवार, समाज के सामने अपमानित होना पड़ता है। पुत्र आज्ञाकारी नहीं होगा तो वह अपनी मनमानी करेगा। कई बार ऐसे पुत्र कुछ ऐसा काम कर देते हैं, जिसके कारण न सिर्फ पिता को बल्कि पूरे परिवार व कुटुंब को ही अपमान झेलना पड़ता है। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां पुत्र के कारण पिता को अपमानित होना पड़ा जैसे- दुर्योधन के कारण धृतराष्ट्र का राजपाठ ही नहीं बल्कि पूरे परिवार का ही नाश हो गया। इसलिए कहते हैं कि पुत्र आज्ञाकारी हो तो इससे बड़ा सुख दुनिया में और कोई नहीं है। और यदि पुत्र अपने पिता की बात नहीं मानता तो इससे बड़ा कोई दुख नहीं है।

4. दुष्ट लोगों की सेवा करना

जो लोग दुष्ट यानी बुरे काम करने वाले लोगों के साथ रहते हैं व उनकी सेवा करते हैं अर्थात उनकी बात मानते हैं, ऐसे लोगों को भी अपने जीवन में कभी न कभी अपमानित जरूर होना पड़ता है। जो लोग बुरे काम करते हैं, वे हमेशा अपने निजी स्वार्थ के बारे में सोचते हैं। जरूरत पड़ने पर वह अपने साथी को भी बलि का बकरा बना सकते हैं। जिस दिन इन लोगों की सच्चाई सामने आती हैं इनके परिवार वालों की भी शर्मिंदा होना पड़ता है। उनके साथ-साथ ऐसे लोगों के साथ रहने वाले लोगों भी अपमानित होना पड़ता है। इसलिए बुरे काम करने वाले लोगों से दूर रहने में भलाई है।

5. किसी का अहित करते हुए मृत्यु होना

अगर किसी का नुकसान करते हुए आपकी मौत हो जाती है तो ये भी अपमान का कारण है। हालांकि मृत्यु के बाद मान-अपमान का कोई महत्व नहीं रह जाता, लेकिन आपकी सालों से कमाई इज्जत पर इसका असर जरूर पड़ता है। आपके परिवार व आने वाली पीढ़ियों को भी आपके द्वारा किए गए इस काम के कारण शर्मिंदा होना पड़ सकता है। इसलिए कभी भी किसी का नुकसान नहीं करना चाहिए, यहां तक कि सोचना भी नहीं चाहिए।

Friday, December 18, 2015

गाय को रोटी खिलाने से पूरी होती है मुराद, इन उपायों से भी चमकेगी किस्मत


प्रतीकात्मक तस्वीर।

लखनऊ. आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में हर इंसान पैसे के पीछे भाग रहा है। उनके पास न परिवार के लिए वक्त है और न ही अपने लिए। कड़ी मेहनत करने के बाद भी वो इतना पैसा नहीं कमा पाता, जिसमें उसकी हर इच्छा पूरी हो जाए। इसके लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं, जिन्हें आजमाने से जीवन की हर परेशानी दूर की जा सकती है।

सुबह उठकर हथेलियों को चेहरे पर फेरें
रोज सुबह जब आप उठें तो सबसे पहले दोनों हाथों की हथेलियों को कुछ देर तक देखें। इसके बाद उन्हें चेहरे पर चार से पांच बार फेरे। धर्म ग्रंथों के अनुसार, हथेली के ऊपरी भाग में मां लक्ष्मी, बीच में मां सरस्वती और नीचे के भाग में भगवान विष्णु का स्थान होता है, इसलिए रोज सुबह उठते ही अपनी हथेली देखने से भाग्य चमक उठता है।

गाय को दें पहली रोटी
खाना बनाते वक्त हमेशा पहली रोटी गाय के लिए बनाएं। इसके बाद ही परिवार के बाकी लोगों की रोटियां सेकें। ग्रंथों में कहा गया है कि गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। इसलिए रोज एक रोटी गाय को खिलानी चाहिए। इससे सभी देवता प्रसन्न होते हैं और हर मुराद पूरी करते हैं।

चीटियों को शक्कर मिला डालें आटा
अगर कड़ी मेहनत करने के बाद भी आपकी किस्मत नहीं चमक रही है तो रोज चीटियों को शक्कर मिला आटा डालें। ऐसा करने से पाप कर्म कटते हैं और पुण्य प्राप्त होता है। करीब एक महीने तक ऐसा किया जाए तो इसका फल जरूर मिलता है।

रोज सुबह करें घर की सफाई
घर को हमेशा साफ और स्वच्छ रखना चाहिए। रोज सुबह झाड़ू-पोछा करना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि सूरज डूबने के बाद कभी घर में झाड़ू-पोछा नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से धनहानि होती है। धर्म ग्रंथों में इसका जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति सूर्यास्त के बाद झाड़ू-पोछा करता है, उसके घर लक्ष्मी का वास कभी नहीं रहता है।

देवताओं को फूलों से सजाएं
घर में बने मंदिर में देवी-देवताओं को रोज फूलों से सजाना चाहिए। इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि फूल ताजे ही हों। साथ ही स्नान करने के बाद ही तोड़े गए हों। रोज ऐसा करने से भगवान जल्द ही जीवन की हर परेशानी दूर कर देते हैं।

मछलियों को खिलाएं आटे की गोलियां
अपने घर के आस-पास कोई ऐसा तालाब, झील या नदी का चयन करें, जहां बहुत सी मछलियां हों। यहां रोज जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का यह बहुत ही अचूक उपाय है। नियमित रूप से जो यह उपाय करता है, कुछ ही दिनों में उसकी परेशानियां दूर होने लगती हैं।

पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं
रोज सुबह स्नान आदि करने के बाद पीपल के पेड़ पर एक लोटा जल चढ़ाएं। ऐसी मान्यता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है। रोज ऐसे करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं। इस पेड़ का महत्व इसी बात से जाना जा सकता है कि अर्जुन को गीता को उपदेश देते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं को पेड़ों में पीपल बताया था।

कभी खाली हाथ न जाएं घर
जब भी आप कहीं बाहर से घर जाएं तो खाली हाथ कभी न जाएं। घर में हमेशा कुछ ना कुछ नई चीज लेकर जानी चाहिए। चाहे वो किसी पेड़ का पत्ता हो या फिर टॉफी या चॉकलेट।
http://www.bhaskar.com/news/UP-LUCK-these-ways-convert-your-bad-luck-into-good-luck-5180681-PHO.html

Thursday, December 17, 2015

रोज घर से निकलने से पहले करेंगे ये 5 काम तो पूरा दिन रहेगा शुभ


कहा जाता है कि अगर दिन की शुरुआत सही हो तो पूरा दिन अच्छी तरह बितता है। इसलिए, हिंदू धर्म में दिन की शुरुआत को लेकर कई मान्यताएं मानी जाती हैं। उन्हीं मान्यताओं के अनुसार, ऐसे 5 काम बताए गए हैं, जिनके साथ दिन की शुरुआत करने से पूरा दिन शुभ हो जाता है। मनुष्य को अपने सभी कामों में सफलता मिलती है।

जानें कौन से हैं वे 5 काम-

1. स्नान


रातभर में शरीर अपवित्र हो जाता है, जिसके लिए स्नान करके खुद को पवित्र करना बहुत ही जरुरी होता है। स्नान करने से शरीर के साथ-साथ मन भी पवित्र हो जाता है। जो मनुष्य रोज सुबह स्नान करने के बाद घर की रसोई में जाता है या घर से बाहर निकलता है, उस पर भगवान हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उसको अपने सभी कामों में सफलता जरुर मिलती है।
2. भगवान के दर्शन और पूजा
कई धर्म ग्रंथों में इस बात का महत्व बताया गया है। जो मनुष्य रोज सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान के दर्शन और पूजा करता है, उसका दिन निश्चित ही शुभ हो जाता है। अगर पूजा न भी कर सकें तो दर्शन जरुर करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य के सभी परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं और जीवन में सुख-शांति स्थापित होती है।पन
3. तुलसी को जल चढ़ाना और सेवन करना

हिंदू धर्म में तुलसी को भी भगवान का ही रूप माना जाता है। तुलसी को जल चढ़ाने और उसकी पूजा करके दीपक आदि लगाने का बहुत ही महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि बिना स्नान किए तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इसके अलावा तुलसी पत्र को दांतों के चबाना भी वर्जित माना जाता है। जो मनुष्य इन बातों का ध्यान रखते हुए रोज सुबह तुलसी की पूजा और सेवन करता है, उसका पूरा दिन शुभ हो जाता है।
4. बड़ों का आशीर्वाद लेना
रोज सुबह घर से निकलने से पहले घर से बड़ों से आशीर्वाद लेने जरुर लेना चाहिए। जो मनुष्य अपने घर के बड़ों का मान-सम्मान करता है और उनका आशीर्वाद लेता है, उस पर भगवान भी हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए, रोज घर से निकलने से पहले अपने माता-पिता आदि का आशीर्वाद जरुर लें।

5. दही खाना


मान्यताओं के अनुसार, घर से निकलने से पहले या किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले दही-शक्कर खाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आने वाली विपदा टल जाती है और सभी कामों में सफलता मिलती है। हर किसी को रोज सुबह घर से निकलने से पहले दही-शक्कर का सेवन करना चाहिए। इससे पूरा दिन शुभ हो जाता है।
http://religion.bhaskar.com/news/JM-JKR-DHAJ-do-these-5-works-before-leaving-the-house-everyday-will-bring-good-luck-in-hindi-5194784.html

Wednesday, December 16, 2015

खर मास आज सेः इसलिए खास है ये महीना, ये है महत्व



 
भगवान सूर्य संपूर्ण ज्योतिष शास्त्र के अधिपति हैं। सूर्य का मेष आदि 12 राशियों पर जब संक्रमण (संचार) होता है, तब संवत्सर बनता है, जो एक वर्ष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्ष में दो बार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु व मीन में होता है, उस समय को खर, मल व पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।
इस बार खर मास का प्रारंभ 16 दिसंबर, बुधवार से हो रहा है, जो 14 जनवरी, 2016 गुरुवार को समाप्त होगा। इस मास की मलमास की दृष्टि से जितनी निंदा है, पुरुषोत्तम मास की दृष्टि से उससे कहीं श्रेष्ठ महिमा भी है।
भगवान पुरुषोत्तम ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा तथा मेरी सादृश्यता को प्राप्त करके यह मास अन्य सब मासों का अधिपति होगा। यह जगत पूज्य और जगत का वंदनीय होगा और यह पूजा करने वाले सब लोगों के दारिद्रय का नाश करने वाला होगा-
अहमेवास्य संजात: स्वामी च मधुसूदन:। एतन्नान्मा जगत्सर्वं पवित्रं च भविष्यति।।
मत्सादृश्यमुपागम्य मासानामधिपो भवेत्। जगत्पूज्यो जगद्वन्द्यो मासोयं तु भविष्यति।।
पूजकानां सर्वेषां दु:खदारिद्रयखण्डन:।।
 

जानिए खर मास में क्या करें- क्या नहीं

खर मास के संबंध में हमारे धर्मग्रंथों में अनेक नियम बताए गए हैं। महर्षि वाल्मीकि ने खर मास के नियमों के संबंध में कहा है कि-
1. इस मास में गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, मटर, बथुआ, शहतूत, सामक, ककड़ी, केला, घी, कटहल, आम, हर्रे, पीपल, जीरा, सौंठ, इमली, सुपारी, आंवला, सेंधा नमक आदि भोजन पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. इसके अतिरिक्त मांस, शहद, चावल का मांड, चौलाई, उरद, प्याज, लहसुन, नागरमोथा, छत्री, गाजर, मूली, राई, नशे की चीजें, दाल, तिल का तेल और दूषित अन्न का त्याग करना चाहिए।
3.
तांबे के बर्तन में गाय का दूध, चमड़े में रखा हुआ पानी और केवल अपने लिए ही पकाया हुआ अन्न दूषित माना गया है। इसलिए इनका भी त्याग करना चाहिए।
4. पुरुषोत्तम मास में जमीन पर सोना, पत्तल पर भोजन करना, शाम को एक वक्त खाना, रजस्वला स्त्री से दूर रहना और धर्मभ्रष्ट संस्कारहीन लोगों से संपर्क नहीं रखना चाहिए।
5.
किसी प्राणी से द्रोह नहीं करना चाहिए। परस्त्री का भूल करके भी सेवन नहीं करना चाहिए। देवता, वेद, ब्राह्मण, गुरु, गाय, साधु-सन्यांसी, स्त्री और बड़े लोगों की निंदा नहीं करनी चाहिए।

इसलिए कहते हैं खर को पुरुषोत्तम मास

हिंदू धर्मशास्त्रों में खर मास को बहुत ही पूजनीय बताया गया है। खर मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। खर मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है इसके संबंध में हमारे शास्त्रों में एक कथा का वर्णन है जो इस प्रकार है-
प्राचीन काल में जब सर्वप्रथम खर मास की उत्पत्ति हुई तो वह स्वामीरहित मल मास देव-पितर आदि की पूजा तथा मंगल कार्यों के लिए वर्जित माना गया। इसी कारण सभी ओर उसकी निंदा होने लगी। निंदा से दु:खी होकर मल मास भगवान विष्णु के पास वैकुण्ठ लोक में पहुंचा और अपनी पीड़ा बताई। तब भगवान विष्णु मल मास को लेकर गोलोक गए।
वहां भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख का मुकुट व वैजयंती माला धारण कर स्वर्णजडि़त आसन पर बैठे थे। भगवान विष्णु ने मल मास को श्रीकृष्ण के चरणों में नतमस्तक करवाया व कहा कि यह मल मास वेद-शास्त्र के अनुसार पुण्य कर्मों के लिए अयोग्य माना गया है इसीलिए सभी इसकी निंदा करते हैं। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि अब से कोई भी मलमास की निंदा नहीं करेगा क्योंकि अब से मैं इसे अपना नाम देता हूं।
यह जगत में पुरुषोत्तम मास के नाम से विख्यात होगा। मैं इस मास का स्वामी बन गया हूं। जिस परमधाम गोलोक को पाने के लिए ऋषि तपस्या करते हैं वही दुर्लभ पद पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान व दान करने वाले को सरलता से प्राप्त हो जाएंगे। इस प्रकार मल मास पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
 
 
 

Tuesday, December 15, 2015

गरुड़ पुराण: हर किसी को सफलता दिलाते हैं ये 6 उपाय


गरुड़ पुराण में कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जो किसी को भी जीवन में सफलता दिला सकती है। गरुड़ पुराण के एक शलोक के अनुसार, जिस किसी को भी अपने जीवन में उन्नति की इच्छा हों, उन्हें इन 6 की हमेशा पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

श्लोक-

विष्णुरेकादशी गंगा तुलसीविप्रधेवनः।
असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी।।

1. भगवान विष्णु


गरुड़ पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु अपने भक्तों के सभी दुःखों को खत्म करके उनके जीवन में सुख-शांति प्रदान करते हैं। जो मनुष्य रोज अपने दिन की शुरुआत भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करके करता है, उसे अपने काम में सफलता मिलती है। ध्यान रखें भगवान की पूजा करने से पहले स्नान आदि करके शुद्ध हो जाएं।

2. एकादशी-व्रत


ग्रंथों और पुराणों में एकादशी व्रत को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। पुराणों के अनुसार, जो मनुष्य प्रत्येक एकादशी को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखता है, उसे निश्चित ही इसका शुभ फल मिलता है। व्रत करने के अलावा एकादशी के दिन जुआ खेलना, शराब पीना, हिंसा करना आदि काम वर्जित हैं। इसलिए, एकदाशी पर व्रत करने के साथ ही इन कामों से दूर रहें।

3. गंगा नदी


गंगा नदी को सभी नदियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। हर किसी को गंगा नदी को देव तुल्य मान कर, हमेशा उसकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। किसी भी रूप में गंगा का अपमान न करें। इस बातों का ध्यान रखने वाले मनुष्य को निश्चित ही अपने हर काम में सफलता मिलती है।
4. तुलसी

तुलसी भगवान का ही एक रूप है। तुलसी को अपने घर में लगाना, रोज उसे जल देना और उसकी पूजा करना शुभ माना जाता है। हर किसी को रोज भगवान विष्णु के प्रसाद में तुलसी पत्र रखना चाहिए और विष्णु पूजा के बाद तुलसी पूजा करनी चाहिए।

5. पंडित या ज्ञानी


पंडितों या ज्ञानी मनुष्य को सम्मान का पात्र समझना चाहिए। कई लोग इनका मजाक उढ़ाते हैं, जो कि बहुत ही गलत माना जाता है। जो मनुष्य ज्ञानी लोगों का सम्मान करता है और उनकी बताई बातों का पालन अपने जीवन में करता है, वह हर परेशानी का सामना आसानी से कर लेता है और हर काम में सफल होता है।

6. गाय


गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। गाय को शरीर के अलग-अलग भागों में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। जो मनुष्य गाय को देव तुल्य मान कर उसकी पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। साथ ही गाय की पूजा करने और उसे भोजन खिलाने से मनुष्य को अपने जाने-अनजाने किए गए पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।